Shopping cart

Magazines cover a wide array subjects, including but not limited to fashion, lifestyle, health, politics, business, Entertainment, sports, science,

TnewsTnews
  • Home
  • Uttar Pradesh
  • ‘मम्मी-पापा मुझे माफ कर देना’ सुसाइड नोट में ये बातें लिख नर्सिंग छात्रा ने दी जान; बनना चाहती थी डॉक्‍टर
Uttar Pradesh

‘मम्मी-पापा मुझे माफ कर देना’ सुसाइड नोट में ये बातें लिख नर्सिंग छात्रा ने दी जान; बनना चाहती थी डॉक्‍टर

Email :

प्रयागराज के स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय स्थित नर्सिंग हॉस्टल में जीएनएम प्रथम वर्ष की 20 वर्षीय छात्रा प्रीति सरोज ने सुसाइड नोट लिखकर फंदे से लटककर जान दे दी। एसीपी कोतवाली मनोज सिंह का कहना है कि छात्रा को पहले एक कान से सुनाई नहीं पड़ता था। दूसरे कान से भी सुनाई पड़ना कम हो गया था। इससे वह परेशान रहती थी। संभवत इसी वजह से उसने खुदकुशी की है।

दूसरे कान से सुनाई देना हो गया था कम

कौशांबी की रहने वाली थी छात्रा। सहपाठी छात्रा को दवा लगाने की बात कहकर कमरे से किया बाहर।

प्रीति सरोज की आत्महत्या

प्रयागराज। ‘मम्मी-पापा मुझे माफ कर देना। मैं डॉक्टर बनना चाहती थी, लेकिन मेरा सपना अधूरा रह गया। मैं कान की बीमारी से बहुत परेशान हूं। दोनों कानों में सुनने में तकलीफ होती है। पूरे शरीर में भी खुजली रहती है। अब और नहीं झेल सकती, इसलिए सुसाइड करने जा रही हूं।’ यह सुसाइड नोट स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय स्थित नर्सिंग हॉस्टल में जीएनएम प्रथम वर्ष की 20 वर्षीया छात्रा प्रीति सरोज ने लिखकर बुधवार सुबह फंदे से लटककर जान दे दी।

पुलिस और फोरेंसिक टीम की जांच

कोतवाली पुलिस के साथ फोरेंसिक टीम ने जांच पड़ताल की। घरवालों के साथ ही हॉस्टल के अधिकारियों, कर्मचारियों व प्रीति के सहपाठी छात्राओं से बातचीत की। कौशांबी जनपद के संदीपन घाट थानांतर्गत फरीदपुर निवासी शत्रुध्न सरोज राजमिस्त्री हैं। उनकी दो पुत्री व दो पुत्र में दूसरे नंबर की प्रीति पढ़ाई में काफी तेज थी, जिस कारण पिछले वर्ष उसका प्रवेश सरकारी कॉलेज में हुआ था। वह जीएनएम प्रथम वर्ष की छात्रा थी और एसआरएन चिकित्सालय स्थित नर्सिंग हॉस्टल में रहती थी।

प्रीति ने पिता को किया था फोन

11 फरवरी को उसकी तबीयत बिगड़ी तो दूसरे दिन उसके पिता यहां आए और उसे अपने साथ घर ले गए। तबीयत ठीक होने पर 23 फरवरी को हॉस्टल लाकर छोड़ा। बुधवार सुबह 7:22 बजे प्रीति ने अपने पिता को फोन किया। मेडिकल प्रमाण पत्र लाने की बात कही। उसके पिता घर में रखा मेडिकल प्रमाण पत्र लेकर निकलते, इसके पहले उनके पास हॉस्टल से फोन आया कि प्रीति ने खुदकुशी कर ली है। वह पत्नी के साथ रोते-बिलखते यहां पहुंचे।

दवा लगाने की कही थी बात

कोतवाली इंस्पेक्टर रोहित तिवारी फोर्स के साथ पहुंचे। हॉस्टल के अधिकारियों से बातचीत की। इसके बाद उसके साथ कमरे में रहने वाली छात्रा से बातचीत की। उसने बताया कि कमरे में पांच छात्राएं रहती थीं। तीन छात्राएं महाशिवरात्रि पर दर्शन करने के लिए मंदिर चली गईं थीं। वह कमरे में थीं। करीब दस बजे प्रीति ने उससे कहा कि स्नान करने से पहले उसे दवा लगानी है, इसलिए कुछ देर के लिए बाहर चली जाए। वह छत पर चली गई। करीब 15 मिनट बाद आई तो अंदर से दरवाजा बंद था। उसने दरवाजे पर दस्तक दी, लेकिन कोई आहट नहीं मिली।

रस्सी से लटक रहा था शव

आवाज देने पर भी प्रीति ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। यह बात उसने हॉस्टल के कर्मचारियों को बताई। खिड़की से कमरे के भीतर देखा गया तो पंखे से नायलॉन की रस्सी के सहारे उसकी लाश लटक रही थी। उसने यह भी बताया कि इधर कुछ समय से प्रीति परेशान थी। उसे कोई बीमारी थी, जिससे वह टूट गई थी।

पुलिस की कार्रवाई

पुलिस ने फोरेंसिक टीम को बुलाया और फिर किसी प्रकार दरवाजा खोलकर पुलिस भीतर दाखिल हुई। मेज पर सुसाइड नोट रखा था। पुलिस ने घरवालों से बातचीत की, लेकिन वह आत्महत्या की कोई वजह नहीं बता सके। बेटी को क्या बीमारी थी, इस बारे में भी वह स्पष्ट तौर पर कुछ नहीं बता सके। एसीपी कोतवाली मनोज सिंह का कहना है कि छात्रा को पहले एक कान से सुनाई नहीं पड़ता था। इधर उसके दूसरे कान से भी सुनाई पड़ना बेहद कम हो गया था। इससे वह परेशान रहती थी और संभवत: इसी वजह से उसने खुदकुशी की है। हालांकि, मामले की जांच की जा रही है। बरामद सुसाइड नोट प्रीति ने ही लिखा है या नहीं, विशेषज्ञों से इसकी जांच कराई जाएगी।

गरीबी व हालातों से लड़ना सीखो

प्रीति की खुदकुशी की खबर पाकर उसके माता-पिता पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। पिता ने बताया कि उसके चार बच्चे हैं। सबसे बड़ी पुत्री की शादी हो गई है। प्रीति दूसरे नंबर पर थी, जबकि इसके बाद पुत्र अंकित व आशीष हैं। प्रीति ने जब सुबह उनको फोन किया तो वह ठीक थी। बस इतना बोला कि मेडिकल प्रमाण पत्र लेकर आइए। इसके कुछ ही देर बाद उनको पता चला कि बेटी ने आत्महत्या कर ली है। मां ने बताया कि बेटी से बहुत उम्मीद थी। वह पढ़ने में होनहार थी। सोचा था कि जीवन भर गरीबी का जो दंश झेला बुढ़ापे में सुख मिलेगा, लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था। बोली कि बेटी हमेशा कहती थी कि गरीबी व हालातों से लड़ना सीखो। कभी घबराओ नहीं, लेकिन वह ही हालातों से नहीं लड़ सकी।

img

खबर भेजने के लिए व्हाट्स एप कीजिए +917579990777 pawansingh@tajnews.in

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Posts