Labhchand Market Agra Shopkeepers Meet DM Arvind Mallappa Bangari Abhimanyu Singh

City Desk, Taj News Reported by: Abhimanyu Singh | Updated: Fri, 13 Feb 2026 05:45 PM IST

आगरा (Agra): शहर के सबसे व्यस्त व्यावसायिक क्षेत्रों में शुमार राजा मंडी (Raja Mandi) स्थित लाभचंद मार्केट (Labhchand Market) एक बार फिर गहरे संकट में घिर गया है। करीब 75 वर्ष पुराने इस ऐतिहासिक बाजार के 25 से अधिक किरायेदारों और दुकानदारों ने शुक्रवार को कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी (DM Arvind Mallappa Bangari) को ज्ञापन सौंपा। दुकानदारों ने आशंका जताई है कि कुछ झूठी और दुर्भावनापूर्ण शिकायतों के आधार पर बाजार पर ‘विध्वंसात्मक कार्रवाई’ (Demolition) की जा सकती है, जिससे सैकड़ों परिवारों की रोजी-रोटी छिन जाएगी।

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Abhimanyu Singh

City & Administration Reporter, Taj News (Agra)

🏢 लाभचंद मार्केट विवाद: मुख्य बिंदु

  • 📄 वैधता: दुकानदारों का दावा, 1940 और 1947 के वैध पट्टों पर बना है बाजार।
  • 💰 विवाद की जड़: पुराने किराये (50-100 रु) और लाखों में सब-लेटिंग (Sub-letting) का खेल।
  • ⚖️ मांग: मृत लोगों के नाम से की गई फर्जी शिकायतों की जांच और दुकानदारों को संरक्षण।
Labhchand Market Agra Shopkeepers Meet DM Arvind Mallappa Bangari Abhimanyu Singh
जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी को प्रार्थना पत्र सौंपते लाभचंद मार्केट, राजा मंडी के दुकानदार। (फोटो: ताज न्यूज़)

पट्टे वैध, निर्माण स्वीकृत, फिर अतिक्रमण कैसे?

जिलाधिकारी को दिए गए प्रार्थना पत्र में दुकानदारों ने साफ किया है कि लाभचंद मार्केट दो वैध पट्टों पर निर्मित है, जो शासन द्वारा वर्ष 1940 और 1947 में विधिवत प्रदान किए गए थे। पिछले 75 सालों में किसी भी प्राधिकरण ने इन पट्टों को अवैध घोषित नहीं किया। बाजार का निर्माण स्वीकृत भवन मानचित्रों (Approved Maps) के अनुरूप किया गया है। फुटपाथ पर दिखने वाले खंभे भी 1950 के दशक के स्वीकृत बरामदे का हिस्सा हैं। ऐसे में छह दशक बाद अचानक बाजार को अवैध बताना पूरी तरह से संदिग्ध है।

किराया विवाद से भड़की आग

प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, इस पूरे विवाद की असली वजह किराया वृद्धि है। आरोप है कि कुछ किरायेदार आज भी 50 से 100 रुपये प्रतिमाह के पुराने किराये पर दुकानें चला रहे हैं, जबकि वे दुकानों के बाहर बैठने वाले फेरीवालों से भारी रकम वसूलते हैं। एक मामला ऐसा भी सामने आया है जहां 112.50 रुपये प्रतिमाह मूल किराये वाली दुकान को 1,25,000 रुपये प्रतिमाह पर उपकिराये (Sub-let) पर दिया गया है। ऐसे विवादों की आड़ में विधिसम्मत किराया देने वाले दुकानदारों को फंसाया जा रहा है।

गाटा संख्या 287 (सड़क भूमि) को लेकर भ्रम

शिकायतों में पट्टे की भूमि को गाटा संख्या 287 (सड़क की जमीन) बताया जा रहा है। हालांकि, दुकानदारों का कहना है कि 10 फरवरी 2026 को हुए आधिकारिक सीमांकन में यह साफ हो गया कि महात्मा गांधी रोड से कन्हैया बिल्डिंग के पश्चिमी छोर तक राजा मंडी रोड का क्षेत्रफल ही 1270 वर्गमीटर से अधिक है, जो कथित गाटा संख्या 287 के कुल क्षेत्रफल से भी ज्यादा है। यह तथ्य साबित करता है कि बाजार सड़क की जमीन पर नहीं है।

मृत लोगों के हस्ताक्षर से रची गई जालसाजी!

व्यापारियों ने एक गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पिछले दो दशकों में कई साइक्लोस्टाइल शिकायती पत्र भेजे गए हैं, जिनमें मृत व्यक्तियों के हस्ताक्षर भी मिले हैं। प्रतिनिधिमंडल में शामिल अभिषेक जैन, पुष्पेंद्र तोमर, अनूप गुप्ता, वीरेंद्र शर्मा, वासुदेव और अन्य दुकानदारों ने डीएम से मांग की है कि इन फर्जी हस्ताक्षरों की स्वतंत्र जांच कराकर FIR दर्ज की जाए। उन्होंने प्रशासन से गुहार लगाई है कि 10 फरवरी के क्षेत्रीय सर्वेक्षण के निष्कर्ष सार्वजनिक किए जाएं और बिना निष्पक्ष जांच के कोई भी दमनात्मक कार्रवाई न की जाए।

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(डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट दुकानदारों द्वारा जिलाधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन पर आधारित है।)

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