
Opinion Desk, Taj News Published by: ठाकुर पवन सिंह | Updated: Thursday, 12 Feb 2026 08:30 AM IST

आगरा: “क्या शहर सिर्फ इमारतों को यहाँ से वहाँ करने से बदल जाते हैं?” यह सवाल आज हर आगरावासी के मन में है। आगरा हमेशा से एक परिवर्तनशील शहर रहा है, लेकिन वरिष्ठ पत्रकार बृज खंडेलवाल का मानना है कि यह शहर एक विशेष “Agra Shifting Syndrome” से ग्रस्त है। चाहे मुगलों की राजधानी हो, अंग्रेजों का हाई कोर्ट, या आज की मंडियां और जेल… आगरा में सब कुछ बस ‘शिफ्ट’ हो रहा है, लेकिन समस्याएं जस की तस हैं।

बृज खंडेलवाल
वरिष्ठ पत्रकार एवं पर्यावरण चिंतक
⚡ विस्थापन की कहानी (Key Highlights)
- 🏛️ राजधानी और कोर्ट: मुगलों ने राजधानी हटाई, अंग्रेजों ने हाई कोर्ट इलाहाबाद शिफ्ट किया।
- 🏭 उद्योग: 1993 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर उद्योग शहर से बाहर फेंके गए।
- 🏢 जेल से बाज़ार: 1975 में जेल हटी तो संजय प्लेस बना, अब मंडियां भी शिफ्ट हो रही हैं।
आगरा का “Agra Shifting Syndrome” कोई नई बीमारी नहीं है। इतिहास गवाह है कि मुगल बादशाह अकबर ने शेख सलीम चिश्ती की सलाह पर राजधानी आगरा से फतेहपुर सीकरी (Fatehpur Sikri) शिफ्ट की थी, लेकिन पानी की कमी ने उस भव्य प्रयोग को फेल कर दिया। मुगलों ने बाद में दिल्ली को चुना। अंग्रेजों ने भी आगरा को यूनाइटेड प्रॉविंसेज की राजधानी बनाया, लेकिन जल्द ही राजधानी और उच्च न्यायालय दोनों को यहाँ से हटा दिया गया।
आजादी के बाद और बढ़ा ‘विस्थापन’
1970 के दशक में, ताजमहल को बचाने के लिए डॉ. एस. वर्दराजन समिति की सिफारिशों के बाद उद्योगों को पथवारी और फ्रीगंज से हटाकर नूनिहाई और फाउंड्री नगर भेजा गया। यह उस नए युग की शुरुआत थी जहाँ “पर्यावरण” के नाम पर आर्थिक गतिविधियों को शहर से बाहर धकेला जाने लगा।
जून 1975 के आपातकाल में केंद्रीय जेल (Central Jail) को शहर के बाहर भेजा गया। उसी खाली जमीन पर आज का संजय प्लेस (Sanjay Place) खड़ा है, जो बताता है कि कैसे विस्थापन अक्सर ‘रियल एस्टेट’ के अवसर में बदल जाता है।
Agra Shifting Syndrome: ताजमहल बना मजबूरी?
दिसंबर 1993 में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के आदेश ने सबसे बड़ा झटका दिया। ताज ट्रेपेज़ियम ज़ोन (TTZ) के उद्योगों को या तो बंद करने या कोसी-धौलपुर शिफ्ट करने का फरमान सुनाया गया। यह केवल भौगोलिक शिफ्टिंग नहीं थी, बल्कि हजारों परिवारों की आजीविका का उजड़ना था।
1982 में एशियाई खेलों के दौरान टीवी टावर रामबाग में बना, लेकिन जब वह ताजमहल के “पाँचवें मीनार” जैसा दिखने लगा, तो उसे शम्साबाद रोड शिफ्ट कर दिया गया। यह घटना शहर की दुविधा को दर्शाती है—विरासत और आधुनिकता का टकराव।
अब मंडियों और बाजारों की बारी
बाजारों का भी वही हाल है। चीपी टोला की सब्जी मंडी सिकंदरा चली गई। ताजगंज का कसाईघर कुबेरपुर शिफ्ट हो गया। अब हिंग की मंडी के जूता बाजार और सुभाष बाजार के कपड़ा व्यापारियों पर भी तलवार लटकी है। ताजगंज के लोग तो हर दिन इस डर में जीते हैं कि कब सौंदर्यीकरण के नाम पर उन्हें बेघर कर दिया जाएगा।
“आगरा आज एक विरोधाभास है—कालातीत ताजमहल से बंधा हुआ, फिर भी अपने नागरिक जीवन में सदैव अस्थिर। जब तक शहर विरासत और इंसान के बीच संतुलन बनाना नहीं सीखता, यह ‘Agra Shifting Syndrome’ इसे सताता रहेगा।”
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(डिस्क्लेमर: इस लेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी हैं। ताज न्यूज़ नेटवर्क का इससे सहमत होना अनिवार्य नहीं है।)
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