National Desk, tajnews.in | Monday, April 20, 2026, 06:45:30 PM IST

नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली में वाहनों की लगातार बढ़ती संख्या और सिकुड़ती पार्किंग की जगह अब लोगों के लिए जानलेवा साबित होने लगी है। दिल्ली के पॉश इलाकों में शुमार पूर्वी दिल्ली के प्रीत विहार (Preet Vihar) क्षेत्र से एक बेहद सनसनीखेज और खौफनाक वारदात सामने आई है। रविवार, 19 अप्रैल 2026 की रात यहां पड़ोसियों के बीच कार खड़ी करने (Parking Dispute) को लेकर हुआ एक मामूली सा विवाद इतना हिंसक और खूनी हो गया कि बात हथियारों तक जा पहुंची। इस विवाद में एक रसूखदार पड़ोसी ने अपना आपा खोते हुए दूसरे व्यक्ति की सरेआम गोली मारकर बेरहमी से हत्या कर दी। अचानक चली गोलियों की तड़तड़ाहट से प्रीत विहार का यह शांत और पॉश इलाका दहल उठा। सरेआम हुई इस हत्या ने पूरी दिल्ली की कानून व्यवस्था और लोगों के बीच बढ़ रहे ‘पार्किंग रेज’ (Parking Rage) की खतरनाक मानसिकता को उजागर कर दिया है। घटना को अंजाम देने के बाद हत्यारा पड़ोसी अपने परिवार सहित मौके से फरार हो गया है। सूचना मिलते ही पूर्वी दिल्ली पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीमें मौके पर पहुंच गईं। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और हत्यारे की गिरफ्तारी के लिए कई टीमों का गठन कर ताबड़तोड़ दबिश दी जा रही है।
10×10 की जगह के लिए खूनखराबा: कैसे शुरू हुआ विवाद?
दिल्ली जैसे महानगरों में अब घर खरीदना जितना मुश्किल नहीं है, उससे कहीं ज्यादा मुश्किल अपनी गाड़ी खड़ी करने के लिए एक सुरक्षित जगह खोजना हो गया है। प्रीत विहार जैसे विकसित और महंगे इलाके भी इस समस्या से अछूते नहीं हैं। पुलिस सूत्रों और स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों से मिली जानकारी के अनुसार, यह खूनी खेल रविवार रात करीब 10 बजे के आसपास शुरू हुआ था। कॉलोनी की एक संकरी गली में दोनों पड़ोसियों के घर आमने-सामने हैं। बताया जा रहा है कि एक पड़ोसी ने अपनी कार कुछ इस तरह से पार्क कर दी थी कि दूसरे पड़ोसी को अपनी गाड़ी निकालने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।
जब गाड़ी हटाने को लेकर टोक-टाक की गई, तो शुरुआत में केवल हल्की-फुल्की कहासुनी हुई। लेकिन दिल्ली की सड़कों पर लोगों का ‘टॉलरेंस लेवल’ (सहनशक्ति) इतना कम हो चुका है कि बात को सुलझाने के बजाय दोनों पक्ष अपनी-अपनी हठ पर अड़ गए। ताज न्यूज़ की रपट के अनुसार, गाली-गलौज से शुरू हुआ यह विवाद कुछ ही मिनटों में हाथापाई और मारपीट में तब्दील हो गया। दोनों परिवारों के अन्य सदस्य भी इस झगड़े में कूद पड़े। कॉलोनी के कुछ समझदार लोगों ने बीच-बचाव कर मामले को शांत कराने की कोशिश भी की, लेकिन आरोपी के सिर पर एक अलग ही सनक और गुस्सा सवार था। वह किसी भी तरह से पीछे हटने को तैयार नहीं था और यही जिद एक बेगुनाह की मौत का कारण बन गई।
घर से निकाली पिस्टल और कर दी ताबड़तोड़ फायरिंग
जब हाथापाई चरम पर पहुंच गई, तो आरोपी अचानक वहां से दौड़ता हुआ अपने घर के अंदर गया। पड़ोसियों को लगा कि शायद वह डर कर अंदर चला गया है और झगड़ा अब शांत हो जाएगा। लेकिन कुछ ही पलों बाद जब वह घर से बाहर निकला, तो उसके हाथ में एक लोडेड पिस्तौल (Loaded Pistol) थी। पिस्तौल देखते ही गली में मौजूद लोगों और पीड़ित के परिवार में दहशत फैल गई। इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता या भागकर अपनी जान बचाता, सनक में अंधे हो चुके उस आरोपी ने पीड़ित पर सीधा निशाना साधकर ताबड़तोड़ गोलियां बरसानी शुरू कर दीं।
लगातार दो से तीन गोलियां पीड़ित के सीने और पेट के महत्वपूर्ण हिस्सों में जा लगीं। खून से लथपथ होकर वह युवक वहीं सड़क पर तड़पता हुआ गिर पड़ा। रात के सन्नाटे में गोलियों की गूंज से पूरे प्रीत विहार इलाके में खौफ का माहौल बन गया। लोग डर के मारे अपने-अपने घरों की खिड़कियों और दरवाजों के पीछे छिप गए। खूनी वारदात को सरेआम अंजाम देने के बाद, आरोपी बिना किसी पछतावे के तुरंत अपने परिवार के कुछ सदस्यों के साथ अपनी गाड़ी में बैठा और तेज रफ्तार में वहां से फरार हो गया। पीड़ित के परिजनों ने तुरंत लहूलुहान अवस्था में उसे उठाया और पास के ही एक निजी अस्पताल (Private Hospital) लेकर भागे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। अस्पताल में मौजूद डॉक्टरों की टीम ने जांच के बाद उसे मृत घोषित (Declared Dead) कर दिया। यह खबर सुनते ही अस्पताल परिसर में परिजनों की चीख-पुकार मच गई।
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पुलिस का कड़ा एक्शन, सीसीटीवी और क्राइम ब्रांच की जांच
गोलीबारी और हत्या की इस दुस्साहसिक वारदात की सूचना पीसीआर (PCR) के माध्यम से पुलिस को दी गई। कुछ ही मिनटों में पूर्वी दिल्ली पुलिस के आला अधिकारी, प्रीत विहार थाने की फोर्स और क्राइम ब्रांच (Crime Branch) की एक विशेष टीम घटनास्थल पर पहुंच गई। पुलिस ने तुरंत पूरी गली को सील कर दिया और फोरेंसिक विशेषज्ञों (Forensic Experts) की टीम को साक्ष्य जुटाने के लिए बुला लिया गया। फोरेंसिक टीम ने सड़क पर गिरे खून के नमूने, खाली कारतूस और अन्य जरूरी सबूत अपने कब्जे में ले लिए हैं।
पूर्वी दिल्ली के पुलिस उपायुक्त (DCP East Delhi) के कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, इस मामले में हत्या (धारा 103 BNS 2023) और आर्म्स एक्ट के तहत गंभीर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस की पहली प्राथमिकता फरार हत्यारे और उसके परिवार को गिरफ्तार करना है। इसके लिए पुलिस की तीन से चार अलग-अलग टीमें गठित की गई हैं, जो संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही हैं। पुलिस ने कॉलोनी और आसपास के चौराहों पर लगे सभी सीसीटीवी कैमरों (CCTV Cameras) की फुटेज को कब्जे में ले लिया है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि हत्यारा किस रास्ते से और किस गाड़ी में फरार हुआ है। मृतक के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और उन्होंने प्रशासन से जल्द से जल्द न्याय और आरोपी की फांसी की मांग की है।
दिल्ली में ‘पार्किंग रेज’ का बढ़ता खौफनाक मनोवैज्ञानिक पहलू
प्रीत विहार की यह खूनी वारदात केवल एक हत्या का मामला नहीं है, बल्कि यह दिल्ली जैसे महानगरों में पनप रही एक बेहद खतरनाक सामाजिक और मनोवैज्ञानिक बीमारी का संकेत है, जिसे ‘पार्किंग रेज’ (Parking Rage) कहा जाता है। दिल्ली की जनसंख्या और वाहनों की संख्या जिस तेजी से बढ़ रही है, उसके मुकाबले बुनियादी ढांचा और पार्किंग की जगह सिकुड़ती जा रही है। लोग अपने करोड़ों रुपये के घरों के बाहर 10×10 फुट की सड़क पर कब्जा जमाने के लिए हर दिन लड़ रहे हैं।
मनोवैज्ञानिकों (Psychologists) का मानना है कि महानगरों की भागदौड़ भरी जिंदगी, काम का तनाव और लगातार बढ़ता ट्रैफिक लोगों को भीतर ही भीतर बेहद आक्रामक (Aggressive) बना रहा है। ऐसे में पार्किंग का एक छोटा सा विवाद उस दबे हुए गुस्से के लिए एक ‘ट्रिगर पॉइंट’ का काम करता है। इंसान कुछ पल के लिए अपनी सोचने-समझने की शक्ति खो बैठता है और उसे यह भी याद नहीं रहता कि उसके इस एक हिंसक कदम से दो परिवार हमेशा के लिए बर्बाद हो जाएंगे— एक कब्र में चला जाएगा और दूसरा जिंदगी भर के लिए जेल में। प्रशासन और सरकार को अब केवल सड़कों और पुलों के निर्माण तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि हर रिहायशी इलाके में मल्टी-लेवल पार्किंग (Multi-level Parking) जैसी सुविधाएं विकसित करनी होंगी, अन्यथा ऐसे खूनी रविवार दिल्ली की सड़कों पर आम बात बन जाएंगे।
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Thakur Pawan Singh
Editor in Chief, Taj News
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