Sat, 29 Nov 2025 11:36 AM IST, Bengaluru, Karnataka.
कर्नाटक में पिछले कई दिनों से सरकार के शीर्ष पद को लेकर चल रहा अंदरूनी तनाव आखिरकार शांत होता दिख रहा है।
शनिवार सुबह मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की मुलाकात हुई, जिसे कांग्रेस हाईकमान ने भी विशेष महत्व दिया है।
दोनों नेता नाश्ते पर मिले, बातचीत हुई और उसके बाद दोनों ने सोशल मीडिया पर साथ की तस्वीरें पोस्ट कीं। मुलाकात के बाद सिद्धारमैया का बड़ा बयान आया—
“हमारे बीच किसी तरह का मतभेद नहीं है, भविष्य में भी कोई विवाद नहीं होगा।”

नाश्ते पर हुई बातचीत, सिद्धारमैया बोले— “हमारे बीच कोई विवाद नहीं”
मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा:
- “हमारी बातचीत बेहद सकारात्मक रही।”
- “हमारे बीच कोई गलतफहमी नहीं है, न ही कोई मतभेद।”
- “हमने मिलकर कन्फ्यूजन दूर किया है।”
- “हम विपक्ष का मजबूती से मुकाबला करेंगे।”
- “2028 चुनाव को लेकर भी रणनीति पर चर्चा हुई।”
उन्होंने यह भी साफ किया कि कर्नाटक सरकार में नेतृत्व को लेकर विवाद की खबरें बेबुनियाद हैं।
आलाकमान के संकेत पर हुई मुलाकात, DK शिवकुमार याद दिला सकते थे “दिल्ली वाला वादा”
सूत्रों के अनुसार:
- यह मुलाकात कांग्रेस हाईकमान के निर्देश पर तय की गई
- शिवकुमार समर्थकों का दावा था कि मई 2023 में सरकार गठन के समय किए गए वादों पर बात होनी चाहिए
- नाश्ते की टेबल पर शिवकुमार इसे उठाने वाले थे
- उनकी टीम लगातार उन पर इस वादे की याद दिलाने का दबाव बना रही थी
हालांकि मुलाकात के बाद शिवकुमार ने कहा कि बातचीत “बहुत अच्छी” रही।
DK शिवकुमार ने भी पोस्ट की फोटो, लिखा— “कर्नाटक की प्राथमिकताओं पर लंबी चर्चा”
मुलाकात के बाद डिप्टी सीएम शिवकुमार ने सोशल मीडिया पर लिखा:
“आज सुबह कावेरी रेज़िडेंस पर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से नाश्ते पर मुलाकात की।
कर्नाटक की प्राथमिकताओं और आगे की दिशा पर लंबी बातचीत हुई।”
कुल मिलाकर दोनों नेताओं ने एक ही संदेश दिया—
कांग्रेस सरकार अंदर से पूरी तरह एकजुट है।
कौन-कौन मौजूद था?
मुलाकात में:
- मुख्यमंत्री सिद्धारमैया
- उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार
- कानूनी सलाहकार एएस पोन्नाना
करीब एक घंटे की चर्चा हुई।
मुलाकात के दौरान स्टाफ को साफ निर्देश था—
किसी को अंदर न आने दिया जाए।
बैठक के बाद दिल्ली जा सकते हैं शिवकुमार
सूत्रों का दावा:
- शिवकुमार आज दोपहर या रात दिल्ली जा सकते हैं
- कल उनकी यात्रा तय थी, लेकिन आज की बैठक के कारण रोक दी गई
- छोटे भाई डीके सुरेश पहले से दिल्ली में मौजूद हैं
यह पूरी गतिविधि बताती है कि मामला केवल “स्थानीय विवाद” नहीं, बल्कि कांग्रेस नेतृत्व की टॉप लेवल चर्चा से जुड़ा है।
नेतृत्व परिवर्तन की सुगबुगाहट कैसे शुरू हुई?
20 नवंबर से कर्नाटक में हलचल अचानक बढ़ने लगी क्योंकि:
- सरकार के 2.5 साल पूरे हो चुके
- शिवकुमार समर्थकों का दावा है कि “रोटेशन CM मॉडल” पर बात हुई थी
- अब वे चाहते हैं कि हाईकमान उस वादे को पूरा करे
कांग्रेस नेतृत्व इस मुद्दे को शांत करना चाहता है क्योंकि 2028 चुनाव अभी दूर है, और सरकार की स्थिरता ही प्राथमिकता है।
राजनीतिक समीकरण क्या कहते हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार:
- सिद्धारमैया एक अनुभवी प्रशासक हैं और मजबूत जनाधार रखते हैं
- शिवकुमार पार्टी का बड़ा संगठनात्मक चेहरा हैं
- दोनों में सामंजस्य बना रहना कांग्रेस के लिए ज़रूरी है
- पार्टी नहीं चाहती कि कर्नाटक में राजस्थान या मध्य प्रदेश जैसी गुटबाजी दोहराई जाए
आज की मुलाकात उसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।
कर्नाटक कांग्रेस में एकजुटता दिखाने की कोशिश
सूत्र बताते हैं कि:
- सिद्धारमैया ने कुछ मंत्रियों को बुलाकर संदेश दिया कि सरकार एकजुट है
- नेतृत्व परिवर्तन की कोई तत्काल योजना नहीं
- हाईकमान इस मुद्दे को बातचीत से सुलझाना चाहता है
मुलाकात के बाद सरकार में संकट का दावा लगभग खारिज होता दिख रहा है।
संपादन: ठाकुर पवन सिंह | ताज न्यूज़ – आईना सच का
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