पढ़ोगे-लिखोगे तो बनोगे नवाब, खेलोगे-कूदोगे तो… ब्रांड एम्बेसडर
Saturday, 10 January 2026, 8:45:00 AM. India यह कॉलम उस बदलती सामाजिक मानसिकता पर सवाल उठाता है जहाँ शिक्षा की जगह शोहरत और खेल को सफलता का एकमात्र पैमाना बना दिया गया है। ब्रज खंडेलवाल तर्क देते हैं कि खेल और मंच प्रदर्शन पैदा करते हैं, लेकिन विचार नहीं—और एक-आयामी सफलता समाज को सोच में … Continue reading पढ़ोगे-लिखोगे तो बनोगे नवाब, खेलोगे-कूदोगे तो… ब्रांड एम्बेसडर
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