बेगूसराय के गांधी स्टेडियम में एक साथ हो रहे हैं द्वादश ज्योतिर्लिंग के दर्शन

बेगूसराय के गांधी स्टेडियम में एक साथ हो रहे हैं द्वादश ज्योतिर्लिंग के दर्शन

February 20, 2020

शिव संदेश में बीके कंचन ने कहा- कलियुग अब बच्चा नहीं, बल्कि बहुत कम बचा है

बेगूसराय. शुक्रवार को मनाए जाने वाले महाशिवरात्रि की तैयारी हर ओर जोर-शोर से की जा रही है. जिले के तमाम शिवालयों को आकर्षक तरीके से सजाया गया है. शाम में सभी जगह होने वाले शिव पार्वती विवाह को लेकर लोगों में उत्साह का माहौल देखा जा रहा है. इस दौरान प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की और से बेगूसराय के गांधी स्टेडियम में चल रहे हेल्थ, वेल्थ, हैप्पीनेस मेला में भी महाशिवरात्रि महोत्सव की व्यापक तैयारी की गई है.
बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय कार्यक्रम के मुख्य अतिथि होंगे तथा वे भगवान शिव के आध्यात्मिक रहस्य की विस्तार से चर्चा करेंगे. दूसरी ओर इस आध्यात्मिक मेला के दौरान गांधी स्टेडियम में लोगों को एक जगह ही द्वादश ज्योतिर्लिंग के दर्शन कराए जा रहे हैं, विशेषता बताई जा रही है. यहां सौराष्ट्र के सोमनाथ भी दिख रहे हैं तो काशी के विश्वनाथ भी. यहां पर वैद्यनाथ, मल्लिकार्जुन, महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर, केदारनाथ, भीमाशंकर, त्र्यकम्बेश्वर, नागेश्वर, रामेश्वर और घृष्णेश्वर में स्थापित ज्योतिर्लिंग की हूबहू आकृति बनाई गई है. यहां बड़ी संख्या में लोग दर्शन -पूजन कर रहे हैं.
महाशिवरात्रि के मौके पर इस द्वादश ज्योतिर्लिंग की विशेष पूजा अर्चना की तैयारी पूरी कर ली गई है. महाशिवरात्रि की तैयारी के दौरान शिव संदेश में ब्रह्माकुमारी कंचन दीदी ने कहा कि वर्तमान समय में परमपिता शिव परमात्मा नई सतयुगी दुनिया की पुनर्स्थापना के लिए पावन धरती पर एक साधारण मनुष्य तन का आधार लेकर अवतरित हो चुके हैं. कलियुग अब बच्चा नहीं, बल्कि बहुत कम बचा है. परमात्मा सभी मनुष्य आत्माओं के माता-पिता हैं. परमात्मा गर्भ से जन्म नहीं लेते हैं. परमात्मा कहते हैं कि निकट भविष्य में इस पुरानी दुनिया की समाप्ति के बाद नई सतयुगी दुनिया आने वाली है, जिसकी स्थापना का काम प्रजापिता ब्रह्मा द्वारा गुप्त रूप से करायी जा रही है. नई दुनिया की स्थापना होते ही पुरानी दुनिया का विनाश निश्चित है, जिसमें साइंस की अहम भूमिका होगी.
नई दुनिया में हरेक मनुष्य दैवी गुण वाला होगा, श्री लक्ष्मी नारायण का राज होगा, एक राज एक धर्म एक भाषा होगी. सुख, शांति, संपत्ति होगी, हेल्थ वेल्थ हैप्पीनेस से भरा जीवन होगा. नई दुनिया को ही स्वर्ग, हैवन, बैकुंठ, शिवालय, अल्लाह का बगीचा और वंडर ऑफ द वर्ल्ड कहा जाता है. इस नई दुनिया में वही जा पाएंगे जो राजयोग सीखेंगे और परमात्मा के श्रेष्ठ मत पर चलेंगे. परमात्मा का पहला श्रीमत है अपने को आत्मा समझ, परमात्मा शिव बाबा को याद करो. कलयुग के अंत और सतयुग के बीच समय को संगम युग कहा जाता है. परमात्मा संगम पर आकर पुरानी दुनिया को नई दुनिया में परिवर्तित कर संपूर्ण विश्व का कल्याण करते हैं. इसलिए उनको विश्व कल्याणकारी और संगम युग को कल्याणकारी पुरुषोत्तम युग कहते हैं. इसका एक-एक सेकंड अमूल्य है, यदि इस अमूल्य समय को आपने गवां दिया तो बाद में आपको पछताने का भी मौका नहीं मिलेगा.

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