अफ़ग़ानिस्तान: अमेरिका ने अपने सभी सैनिकों को वापस बुलाया, 20 साल पुराना युद्ध समाप्त

अफ़ग़ानिस्तान: अमेरिका ने अपने सभी सैनिकों को वापस बुलाया, 20 साल पुराना युद्ध समाप्त

अफ़ग़ानिस्तान से अपने सभी सैनिकों को वापस बुलाने के कुछ घंटे बाद अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने घोषणा की कि अमेरिकी बलों की वापसी के बाद अब अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान का शासन है. अमेरिकी बलों की वापसी के बाद तालिबान ने काबुल के अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे को पूरी तरह अपने नियंत्रण में ले लिया है. तालिबान नेताओं ने देश को सुरक्षित करने, हवाईअड्डे को फिर से खोलने और पूर्व प्रतिद्वंद्वियों को माफी देने का संकल्प जताया.

 

काबुल/वॉशिंगटन/संयुक्त राष्ट्र:

अफगानिस्तान से अमेरिका की निकासी की 31 अगस्त की समयसीमा पूरी होने से कुछ घंटे पहले अमेरिकी सेना के अंतिम विमान ने राजधानी काबुल स्थित हामिद करजई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से उड़ान भरी और इसी के साथ अमेरिका ने 20 वर्ष पुराने अपने युद्ध के समाप्त होने की घोषणा की.

अमेरिकी मध्य कमान के कमांडर जनरल फ्रैंक मैकेन्जी ने ऑनलाइन आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘मैं अफगानिस्तान से निकलने और अमेरिकी नागरिकों, दूसरे देशों के नागरिकों और अफगानिस्तान के कुछ अहम लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने का अभियान पूरा होने की घोषणा करता हूं.’

उन्होंने कहा, ‘अमेरिकी सेवा का प्रत्येक सदस्य अब अफगानिस्तान से बाहर है.’ साथ ही उन्होंने अमेरिका के सबसे लंबे चले युद्ध के समाप्त होने की घोषणा की.

अमेरिका की अफगानिस्तान से वापसी सितंबर 9/11 के हमले के 20 वर्ष पूरे होने से कुछ वक्त पहले हुई है. इस हमले में आतंकवादी संगठन अलकायदा के आतंकवादियों ने न्यूयॉर्क स्थित वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के ट्विन टावर को विमान से टक्कर मारकर उड़ा दिया था.

इस हमले के बाद अमेरिकी सैनिक तालिबान के शासन को उखाड़ फेंकने के लिए अफगानिस्तान की सरजमीं पर उतरे, जिसने अलकायदा के सरगनाओं को सुरक्षित पनाहगाहें मुहैया कराई थीं.

अमेरिकी बलों की वापसी के बाद अब अफगानिस्तान में तालिबान का शासन है और उन्होंने अमेरिका की वापसी का स्वागत किया है.

तालिबान ने ट्वीट किया,

‘हमारे सभी देशवासियों, प्यारे देश और मुजाहिदीन को बधाई. आज सभी विदेशी बल हमारी पवित्र सरजमीं से चले गए.’

वहीं अफगानिस्तान के लिए अमेरिका के विशेष राजदूत ज़लमय खलीलजाद ने ट्वीट किया, ‘अफगानिस्तान में हमारा युद्ध समाप्त हुआ. हमारे बहादुर सैनिकों, नौसैनिकों, मरीन और वायुसैनिकों ने बेहतरीन सेवाएं दीं और अनेक कुर्बानियां दीं. उनके प्रति हम सम्मान और आदर व्यक्त करते हैं.’

खलीलजाद ने कहा, ‘हमारी सेना और हमारे सहयोगी जो हमारे साथ खड़े रहे, उनकी निकासी के साथ अब अफगान के पास निर्णय लेने के पल हैं. उनके देश का भविष्य अब उनके हाथों में है. वे अपना रास्ता पूरी संप्रभुता के साथ चुनेंगे.’

उन्होंने एक अन्य ट्वीट में कहा, ‘अब तालिबान की परीक्षा की घड़ी है. क्या वे अपने देश को सुरक्षित और समृद्ध भविष्य की ओर ले जा सकते हैं, जहां उनके सारे नागरिक, पुरुष और महिलाओं को तरक्की करने का मौका मिले? क्या अफगानिस्तान अपनी विविध संस्कृति, इतिहास और परंपराओं की ताकत तथा खूबसूरती को दुनिया के सामने दिखा पाएगा?’

अफगानिस्तान में लगभग दो दशकों में सुरक्षा बलों को तैयार करने के लिए अमेरिका और नाटो द्वारा अरबों डॉलर खर्च किए जाने के बावजूद तालिबान ने बीते 15 अगस्त को पूरे देश पर कब्जा कर लिया था. इस बीच देश के राष्ट्रपति अशरफ गनी भी देश छोड़कर जा चुके हैं.

उसके बाद से वहां के तमाम नागरिक देश से निकलने के लिए काबुल हवाई अड्डे पर देखे जा रहे हैं. नागरिक इस भय से देश छोड़ना चाहते हैं कि तालिबान उस क्रूर शासन को फिर से लागू कर सकता है, जिसमें महिलाओं के अधिकार खत्म हो जाएंगे.

अफगानिस्तान में 20 साल बाद अमेरिका की सैन्य मौजूदगी समाप्त: बाइडन
अफगानिस्तान से अपने सभी सैनिकों को वापस बुलाने के कुछ घंटे बाद अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने घोषणा की कि युद्धग्रस्त देश में अमेरिका की 20 साल पुरानी सैन्य मौजूदगी अब समाप्त हो गई है.

जो बाइडन.

बाइडन ने कहा, ‘अब अफगानिस्तान में 20 साल पुरानी हमारी सैन्य मौजूदगी समाप्त हो गई है.’

अमेरिका के राष्ट्रपति ने अफगानिस्तान से समयसीमा (31 अगस्त) के भीतर सैनिकों की सुरक्षित वापसी के लिए सशस्त्र बलों का धन्यवाद किया.

बाइडन ने कहा कि वह मंगलवार को देश को संबोधित करंगे.

उन्होंने कहा, ‘अभी के लिए मैं इतना ही बताना चाहूंगा कि योजना के अनुसार हमारे अभियान को सम्पन्न करने के लिए जमीनी स्तर पर मौजूद सभी जॉइंट चीफ तथा हमारे सभी कमांडर ने सर्वसम्मति से सिफारिश की थी. उनका विचार था कि हमारे सैन्य अभियान को पूर्ण करना हमारे सैनिकों के जीवन की रक्षा और आने वाले हफ्तों तथा महीनों में अफगानिस्तान छोड़ने को इच्छुक लोगों की संभावनाओं को सुदृढ़ करने का सबसे बेहतर तरीका है.’

राष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने विदेश मंत्री से अमेरिका के अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के साथ निरंतर समन्वय स्थापित करने को कहा है ताकि युद्धग्रस्त देश छोड़ने को इच्छुक किसी भी अमेरिकी, अफगान सहयोगियों और विदेशी नागरिकों के लिए सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित किया जा सके.

तालिबान ने काबुल हवाईअड्डे को पूरी तरह अपने नियंत्रण में कर सुरक्षा का किया वादा
अफगानिस्तान से अमेरिकी बलों की पूर्ण वापसी के बाद तालिबान ने काबुल के अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे को पूरी तरह अपने नियंत्रण में ले लिया है. इस दौरान वहां पर खड़े होकर तालिबान नेताओं ने देश को सुरक्षित करने, हवाईअड्डे को फिर से खोलने और पूर्व प्रतिद्वंद्वियों को माफी देने का संकल्प जताया.

देश को नियंत्रण में लेने का संकेत देते हुए पगड़ी पहने तालिबान नेताओं को ‘टरमैक’ पार करते हुए, उनकी बदरी इकाई के लड़ाकों ने घेर लिया. इस दौरान उन्होंने खाकी वर्दी में तस्वीरें भी खिंचवाईं.

हवाईअड्डे को फिर से चालू करना तालिबान के सामने 3.8 करोड़ की आबादी वाले देश पर शासन करने की बड़ी चुनौतियों में से एक है, जो दो दशकों से अरबों डॉलर की विदेशी सहायता पर टिका हुआ था.

तालिबान के एक शीर्ष अधिकारी हिकमतउल्ला वासिक ने समाचार एजेंसी ‘एपी’ से कहा, ‘आखिरकार अफगानिस्तान अब मुक्त हो गया है. हवाईअड्डे पर मौजूद लोग और सेना हमारे साथ और हमारे नियंत्रण में है. उम्मीद है कि हम जल्द ही अपने मंत्रिमंडल की घोषणा करेंगे. सब कुछ शांतिपूर्ण और सुरक्षित है.’

वासिक ने लोगों से काम पर लौटने की अपील की और सभी को माफ करने के अपने संकल्प को दोहराया. उन्होंने कहा, ‘लोगों को सब्र रखना होगा. धीरे-धीरे हम सब कुछ पटरी पर ले आएंगे. इसमें समय लगेगा.’

इससे पहले हवाई क्षेत्र के उत्तरी सैन्य हिस्से में हामिद करजई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के एकमात्र रनवे के पास कुछ वाहन चलते नजर आए. भोर होने से पहले भारी हथियारों से लैस तालिबान के लड़ाके ‘हैंगर’ के पास पहुंचे और अमेरिकी विदेश मंत्रालय द्वारा निकासी अभियान में इस्तेमाल किए गए सात ‘सीएच-46’ हेलीकॉप्टरों को वहां से रवाना होते हुए देखा.

इसके बाद अपनी जीत का जश्न मनाते हुए तालिबान नेता प्रतीकात्मक रूप से रनवे पर चले. तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने कहा, ‘दुनिया ने सबक सीख लिया और यह जीत का सुखद क्षण है.’

 

मुजाहिद ने बदरी इकाई के सदस्यों से कहा, ‘मुझे उम्मीद है कि आप राष्ट्र को लेकर बहुत सतर्क रहेंगे. हमारे देश ने एक युद्ध का सामना किया है तथा लोगों में अब और सहनशक्ति नहीं बची है. अल्लाह महान है.’

तालिबान के 15 अगस्त को काबुल पर कब्जा करने के बाद से ही हवाईअड्डे पर स्थिति तनावपूर्ण थी. एक अमेरिकी ‘सी -17’ सैन्य मालवाहन विमान के किनारे लटकने के बाद नीचे गिरकर कुछ लोगों की मौत हो गई थी. वहीं, इस्लामिक स्टेट द्वारा हवाईअड्डे के बाहर किए गए हमलों में अमेरिकी बल के 13 सदस्य और कम से कम 149 अफगान मारे गए थे.

अमेरिकी सेना के सोमवार देर रात करीब 20 साल बाद अफगानिस्तान में अपनी सैन्य मौजूदगी पूरी तरह खत्म करने के बाद तालिबान लड़ाकों ने जीत का जश्न मनाने के लिए वहां हवा में गोलियां चलाईं.

लोगार प्रांत से हवाईअड्डे पर तैनात तालिबान का एक सुरक्षाकर्मी मोहम्मद इस्लाम हाथ में ‘कलाश्निकोव राइफल’ लिए दिखा. उसने कहा, ‘20 साल बाद हमने अमेरिकियों को मात दे दी. यह स्पष्ट है कि हमें क्या चाहिए. हम शरिया (इस्लामिक कानून), शांति और सौहार्द चाहते हैं.’

कतर में तालिबान के राजनीतिक कार्यालय के प्रवक्ता मोहम्मद नईम ने भी एक वीडियो में तालिबान के देश को नियंत्रण में लेने की तारीफ की.

उसने कहा, ‘अल्लाह का शुक्र है कि हमारे देश पर कब्जा करने वाले सभी वापस चले गए हैं. यह जीत हमें अल्लाह ने दी है. यह जीत मुजाहिदीन और उसके नेताओं के 20 साल के बलिदान के कारण हमें मिली. कई मुजाहिदीन ने इसके लिए अपनी जान दी.’

रह गए कई अमेरिकी और अफगान
अफगानिस्तान से अमेरिका के पांच सैन्य परिवहन विमानों के उड़ान भरने के साथ ही वहां अमेरिका का 20 वर्ष चला युद्ध और निकासी अभियान भले ही समाप्त हो गया, लेकिन अफगानिस्तान में अब भी देश के कम से कम 200 नागरिक रह गए हैं और साथ ही रह गए हैं. वहां से निकलने की आस लगाए हजारों अफगान, जिनका वहां से निकलना अब पूरी तरह से तालिबान पर निर्भर है.

विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कहा कि अमेरिका अपने नागरिकों और अफगानों को वहां से निकालने का प्रयास करता रहेगा और काबुल हवाई अड्डा फिर से खुलने के बाद अफगानिस्तान के पड़ोसी मुल्कों के साथ सड़क रास्ते से या चार्टर्ड विमानों के जरिए उनकी सुरक्षित वापसी का प्रयास करेगा.

उन्होंने कहा, ‘हमें इस बात का कोई भ्रम नहीं है कि ये आसान होगा या जल्दी होगा.’

साथ ही ब्लिंकन ने कहा कि अफगानिस्तान में मौजूद और वहां से निकलने की इच्छा रखने वाले अमेरिकियों की संख्या 100 के करीब होगी.

सोमवार को निकासी अभियान समाप्त होने की पेंटागन की घोषणा के कुछ देर बाद विदेश मंत्री ने कहा कि काबुल में अमेरिकी दूतावास बंद रहेगा और खाली भी रहेगा. उन्होंने कहा कि अमेरिका के राजनयिक कतर के दोहा में रहेंगे.

उन्होंने कहा, ‘हम अमेरिकी नागरिकों, विदेशी नागरिकों और वहां से निकलने की इच्छा रखने वाले अफगानिस्तान के लोगों की मदद के अथक प्रयास जारी रखेंगे. इस संबंध में हमारी कोई समयसीमा तय नहीं है.’

ब्लिंकन ने राष्ट्र के नाम संबोधन में कहा, ‘अब अमेरिकी सैन्य उड़ानें बंद हो गई हैं और हमारे सैनिकों ने अफगानिस्तान छोड़ दिया है. अफगानिस्तान के साथ अमेरिका के जुड़ाव का एक नया अध्याय शुरू हो गया है. हम अपनी कूटनीति के साथ आगे बढ़ेंगे. सैन्य मिशन समाप्त हो गया है. एक नया राजनयिक मिशन शुरू हो गया है.’

उन्होंने कहा कि करीब 6,000 अमेरिकी नागरिकों सहित 1,23,000 से अधिक लोगों को अफगानिस्तान से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है.

उन्होंने कहा, ‘हमने काबुल में अब तक की अपनी राजनयिक उपस्थिति को निलंबित कर दिया है, और अपने दूतावास को कतर के दोहा में स्थानांतरित कर दिया है. जल्द ही औपचारिक रूप से कांग्रेस को इस बारे में सूचित किया जाएगा. अफगानिस्तान में अनिश्चित सुरक्षा और राजनीतिक स्थिति को देखते हुए यह एक विवेकपूर्ण कदम है.’

ब्लिंकन ने कहा कि अमेरिका आतंकवाद से निपटने पर ध्यान केंद्रित रखेगा.

उन्होंने कहा ‘तालिबान ने आतंकवादियों को अफगानिस्तान का इस्तेमाल करने से रोकने की प्रतिबद्धता जाहिर की है. हम उस प्रतिबद्धता के लिए उन्हें जवाबदेह ठहराएंगे. लेकिन तालिबान से अपेक्षा का मतलब यह नहीं है कि हम उन पर भरोसा करेंगे. हम सतर्क रहेंगे और स्थिति का आकलन करेंगे.’

काबुल एयरपोर्ट पर अमेरिकी सैनिक. (फाइल फोटो)

उन्होंने कहा कि जो भी अमेरिकी, विदेशी या अफगान नागरिक युद्ध प्रभावित देश से जाना चाहते हैं, अमेरिका उनकी मदद करेगा. उन्होंने कहा कि अभी भी करीब 200 या उससे कम अमेरिकी अफगानिस्तान में हैं और वहां से जाना चाहते हैं.

सुरक्षा परिषद ने प्रस्ताव पारित कर कहा, अफगानिस्तान का इस्तेमाल हमले के लिए नहीं हो
भारत की अध्यक्षता में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) ने एक प्रस्ताव पारित कर अफगानिस्तान के क्षेत्र का इस्तेमाल किसी अन्य देश को धमकाने या हमला करने या आतंकवादियों को शरण देने तथा उन्हें प्रशिक्षित करने के लिए नहीं किए जाने की मांग की.

प्रस्ताव में उम्मीद जताई गई कि अफगानिस्तान के लोगों और विदेशी नागरिकों के अफगानिस्तान से सुरक्षित एवं व्यवस्थित प्रस्थान के संबंध में तालिबान अपने द्वारा की गई प्रतिबद्धताओं का पालन करेगा.

फ्रांस, ब्रिटेन, अमेरिका और परिषद के अन्य 13 सदस्यों देशों द्वारा लाए प्रस्ताव को मतदान द्वारा पारित किया गया. मतदान के दौरान रूस और चीन मौजूद नहीं थे.

तालिबान के अफगानिस्तान पर कब्जा करने के बाद वहां की स्थिति पर परिषद द्वारा अपनाया गया यह पहला प्रस्ताव है. अगस्त के लिए सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता भारत कर रहा था और उसकी अध्यक्षता के अंतिम दिन इसे पारित किया गया.

अफगानिस्तान की संप्रभुता, स्वतंत्रता, क्षेत्रीय अखंडता तथा राष्ट्रीय एकता के लिए मजबूत प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हुए, प्रस्ताव में 26 अगस्त को काबुल में हामिद करजई अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के पास हुए हमलों की ‘कड़े शब्दों में निंदा की’ गई, जिसकी इस्लामिक स्टेट- खुरासान ने जिम्मेदारी ली है. परिषद के प्रस्ताव में तालिबान द्वारा हमले की निंदा पर भी गौर किया गया.

प्रस्ताव में कहा गया कि वह दृढ़ता से ‘मांग करता है कि किसी भी देश को धमकाने या हमला करने या आतंकवादियों को शरण देने या उन्हें प्रशिक्षित करने के लिए, या आतंकवादी कृत्यों की योजना बनाने या वित्तपोषित करने के लिए अफगान क्षेत्र का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए.’

प्रस्ताव में तालिबान द्वारा 27 अगस्त को जारी किए गए बयान पर गौर किया गया, जिसमें संगठन ने इस बात को लेकर प्रतिबद्धता जतायी थी कि अफगानिस्तान के लोग विदेश यात्रा कर सकेंगे, वे जब चाहें अफगानिस्तान छोड़ सकते हैं और वे दोनों हवाई एवं सड़क मार्ग से किसी भी सीमा से अफगानिस्तान से बाहर जा सकते हैं, जिसमें काबुल हवाई अड्डे को फिर से खोलना तथा उसे सुरक्षित करना शामिल है, जहां से कोई भी उन्हें यात्रा करने से नहीं रोकेगा.

प्रस्ताव में कहा गया कि परिषद यह ‘उम्मीद करता है कि तालिबान इन और अन्य सभी प्रतिबद्धताओं का पालन करेगा, जिसमें अफगानिस्तान के लोगों और सभी विदेशी नागरिकों का अफगानिस्तान से सुरक्षित एवं व्यवस्थित प्रस्थान शामिल है.’

परिषद ने प्रस्ताव के माध्यम से हामिद करजई अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के आसपास ‘खतरनाक सुरक्षा स्थिति’ पर भी ध्यान दिया और ‘खुफिया तंत्रों के क्षेत्र में और आतंकवादी हमले होने की आशंका जताने को लेकर चिंता व्यक्त की.’

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