नवरात्रि के पहले दिन होती है मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा, जानिए विधि, भोग और मंत्र

नवरात्रि का पर्व आज से शुरु हो गया है. शक्ति और भक्ति के इस पर्व का माता के भक्त साल भर इंतजार करते हैं. भारत के हर हिस्से में माता की नौ दिनों की पूजा बेहद धूम धाम के साथ की जाती है. नवरात्रि का संस्कृत में मतलब होता है नौ रातें. पूरे भारत में लोग इन नौ दिनों के त्यौहार को बेहद ही उत्साह के साथ मनाते हैं. नवरात्रि में देवी दुर्गा के भक्त उन्हें पूरे रीति-रिवाज के साथ उपवास करते हैं. इन दिनों मां दुर्गा की अलग अलग शक्तियों की पूजा की जाती है. इस दौरान नवदुर्गा के विभिन्न रूपों को प्रसन्न करने के लिए खास तरह से पूजा की जाती है. इस बार नवरात्रि का पर्व 17 अक्टूबर से शुरू होगा और 25 अक्टूबर 2020 तक रहेगा. 26 अक्टूबर 2020 को दशहरा का पर्व मनाया जाएगा. आइए आपको बताते हैं नवरात्रि के पहले दिन कौन सी देवी की पूजा करनी चाहिए…इसके अलावा बताएंगे कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि. पहले दिन होती है मां शैलपुत्री की पूजा नवरात्रि के पहले दिन शैलपुत्री की पूजा होती है और इस दिन माता की पूजा के दौरान शुद्ध देसी घी चढ़ाया जाता ही. ऐसा माना जाता है की ऐसा करने से माता अपने भक्तों को सभी प्रकार के कष्टों औऱ बीमारी से मुक्ति देती हैं. मां के पहले रूप की पूजा आराधना के दौरान पीले वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है. पुराणों में ये कथा प्रसिद्ध है कि हिमालय के तप से प्रसन्न होकर आद्या शक्ति उनके यहां पुत्री के रूप में अवतरित हुई और इनके पूजन के साथ नवरात्र का शुभारंभ होता है. नवरात्रि में घटस्थापना की विधि नवरात्र पर्व के पहले दिन स्नान आदि के बाद घर में धरती माता, गुरुदेव और इष्ट देव को नमन करने के बाद गणेश जी का आहवान करना चाहिए. इसके बाद कलश की स्थापना करनी चाहिए. इसके बाद कलश में आम के पत्ते और पानी डालें. कलश पर पानी वाले नारियल को लाल वस्त्र या फिर लाल मौली में बांध कर रखें. उसमें एक बादाम, दो सुपारी एक सिक्का जरूर डालें. इसके बाद कलश का पूजन करें. इसके बाद मां दुर्गा की चौकी स्थापित करें और इस मंत्र का जाप करें- ।।गंगे! च यमुने! चैव गोदावरी! सरस्वति! नर्मदे! सिंधु! कावेरि! जलेरस्मिन् सन्निधिं कुरु।। इसके बाद मां सरस्वती, मां लक्ष्मी व मां दुर्गा का आह्वान करें. जोत और धूप बत्ती जला कर देवी मां के सभी रूपों की पूजा करें. घटस्थापना का मुहूर्त 17 अक्टूबर को घट स्थापना मुहूर्त का समय प्रातकाल 06 बजकर 27 मिनट से 10 बजकर 13 मिनट तक है. नवरात्रि का पर्व नियम और विधि पूर्वक मनाना चाहिए. तभी इसका फल मिलता है. नवरात्र के खत्म होने पर कलश के जल का घर में छींटा मारें और कन्या पूजन के बाद प्रसाद वितरण करें. पूजा की विधि नवरात्रि प्रतिपदा के दिन कलश या घट स्थापना के बाद दुर्गा पूजा का संकल्प लें. इसके बाद माता दुर्गा के शैलपुत्री स्वरूप की​ विधि विधान से पूजा अर्चना करें. मां का ये स्वरुप बेहद ही शुभ माना जाता है. इनके एक हाथ में त्रिशुल और दूसरे हाथ में कमल है और ये देवी वृषभ पर विराजमान है जो संपूर्ण हिमालय पर राज करती हैं. नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा करने के लिए इनकी तस्वीर रखें और उसके नीचे लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं. इसके ऊपर केसर से शं लिखें और मनोकामना पूर्ति गुटिका रखें. इसके बाद हाथ में लाल फूल लेकर शैलपुत्री देवी का ध्यान करें और इस मंत्र का जाप करें- ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डाय विच्चे ओम शैलपुत्री देव्यै नम मंत्र के साथ ही हाथ में लिए गए फूल मनोकामना गुटिका और मां की तस्वीर के ऊपर छोड़ दें. इसके बाद माता को भोग लगाएं और उनके मंत्रों का जाप करें. ये जप कम से कम 108 बार होना चाहिए. इस बार की नवरात्रि अत्यंत सुख और समृद्धि प्रदान करने वाली होगी. इस बार की नवरात्रि पूरे 9 दिनों की है. इस साल भले ही कोरोना की वजह से माता का स्वागत इतने धूम-धाम ना हो पाए लेकिन लोगों में नवरात्रि को लेकर अलग तरह का उत्साह होता है. आप भी मां की सच्चे दिल से मां की आराधना करें. एचएस न्यूज की तरफ आप सभी को नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं

नवरात्रि का पर्व आज से शुरु हो गया है. शक्ति और भक्ति के इस पर्व का माता के भक्त साल भर इंतजार करते हैं. भारत के हर हिस्से में माता की नौ दिनों की पूजा बेहद धूम धाम के साथ की जाती है. नवरात्रि का संस्कृत में मतलब होता है नौ रातें. पूरे भारत में लोग इन नौ दिनों के त्यौहार को बेहद ही उत्साह के साथ मनाते हैं.

नवरात्रि में देवी दुर्गा के भक्त उन्हें पूरे रीति-रिवाज के साथ उपवास करते हैं. इन दिनों मां दुर्गा की अलग अलग शक्तियों की पूजा की जाती है. इस दौरान नवदुर्गा के विभिन्न रूपों को प्रसन्न करने के लिए खास तरह से पूजा की जाती है. इस बार नवरात्रि का पर्व 17 अक्टूबर से शुरू होगा और 25 अक्टूबर 2020 तक रहेगा. 26 अक्टूबर 2020 को दशहरा का पर्व मनाया जाएगा. आइए आपको बताते हैं नवरात्रि के पहले दिन कौन सी देवी की पूजा करनी चाहिए…इसके अलावा बताएंगे कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि.

पहले दिन होती है मां शैलपुत्री की पूजा
नवरात्रि के पहले दिन शैलपुत्री की पूजा होती है और इस दिन माता की पूजा के दौरान शुद्ध देसी घी चढ़ाया जाता ही. ऐसा माना जाता है की ऐसा करने से माता अपने भक्तों को सभी प्रकार के कष्टों औऱ बीमारी से मुक्ति देती हैं. मां के पहले रूप की पूजा आराधना के दौरान पीले वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है. पुराणों में ये कथा प्रसिद्ध है कि हिमालय के तप से प्रसन्न होकर आद्या शक्ति उनके यहां पुत्री के रूप में अवतरित हुई और इनके पूजन के साथ नवरात्र का शुभारंभ होता है.

नवरात्रि में घटस्थापना की विधि
नवरात्र पर्व के पहले दिन स्नान आदि के बाद घर में धरती माता, गुरुदेव और इष्ट देव को नमन करने के बाद गणेश जी का आहवान करना चाहिए. इसके बाद कलश की स्थापना करनी चाहिए. इसके बाद कलश में आम के पत्ते और पानी डालें. कलश पर पानी वाले नारियल को लाल वस्त्र या फिर लाल मौली में बांध कर रखें. उसमें एक बादाम, दो सुपारी एक सिक्का जरूर डालें. इसके बाद कलश का पूजन करें.

इसके बाद मां दुर्गा की चौकी स्थापित करें और इस मंत्र का जाप करें-
।।गंगे! च यमुने! चैव गोदावरी! सरस्वति!
नर्मदे! सिंधु! कावेरि! जलेरस्मिन् सन्निधिं कुरु।।

इसके बाद मां सरस्वती, मां लक्ष्मी व मां दुर्गा का आह्वान करें. जोत और धूप बत्ती जला कर देवी मां के सभी रूपों की पूजा करें.

घटस्थापना का मुहूर्त
17 अक्टूबर को घट स्थापना मुहूर्त का समय प्रातकाल 06 बजकर 27 मिनट से 10 बजकर 13 मिनट तक है. नवरात्रि का पर्व नियम और विधि पूर्वक मनाना चाहिए. तभी इसका फल मिलता है. नवरात्र के खत्म होने पर कलश के जल का घर में छींटा मारें और कन्या पूजन के बाद प्रसाद वितरण करें.

पूजा की विधि
नवरात्रि प्रतिपदा के दिन कलश या घट स्थापना के बाद दुर्गा पूजा का संकल्प लें. इसके बाद माता दुर्गा के शैलपुत्री स्वरूप की​ विधि विधान से पूजा अर्चना करें. मां का ये स्वरुप बेहद ही शुभ माना जाता है. इनके एक हाथ में त्रिशुल और दूसरे हाथ में कमल है और ये देवी वृषभ पर विराजमान है जो संपूर्ण हिमालय पर राज करती हैं.

नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा करने के लिए इनकी तस्वीर रखें और उसके नीचे लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं. इसके ऊपर केसर से शं लिखें और मनोकामना पूर्ति गुटिका रखें. इसके बाद हाथ में लाल फूल लेकर शैलपुत्री देवी का ध्यान करें और इस मंत्र का जाप करें-

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डाय विच्चे ओम शैलपुत्री देव्यै नम
मंत्र के साथ ही हाथ में लिए गए फूल मनोकामना गुटिका और मां की तस्वीर के ऊपर छोड़ दें. इसके बाद माता को भोग लगाएं और उनके मंत्रों का जाप करें. ये जप कम से कम 108 बार होना चाहिए.

इस बार की नवरात्रि अत्यंत सुख और समृद्धि प्रदान करने वाली होगी. इस बार की नवरात्रि पूरे 9 दिनों की है. इस साल भले ही कोरोना की वजह से माता का स्वागत इतने धूम-धाम ना हो पाए लेकिन लोगों में नवरात्रि को लेकर अलग तरह का उत्साह होता है. आप भी मां की सच्चे दिल से मां की आराधना करें. एचएस न्यूज की तरफ आप सभी को नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं

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