साढ़े 5 माह बाद खुले शक्तिपीठ और मंदिर, मास्क पहनकर पहुंच रहे श्रद्धालु

साढ़े 5 माह बाद खुले शक्तिपीठ और मंदिर, मास्क पहनकर पहुंच रहे श्रद्धालु

कोरोना महामारी के चलते साढ़े पांच माह से बंद धार्मिक स्थल गुरुवार को फिर से खोल दिए गए और श्रद्धालु मंदिरों में आने लगे हैं. शक्तिपीठ और मंदिरों में भक्तों के आने के लिए एसओपी जारी की गई है. उसके तहत मंदिरों में आने वाले श्रद्धालुओं को कोरोना के तमाम नियम कायदों का पालन करना अनिवार्य है.

उल्लेखनीय है कि गत 4 सितम्बर को प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में धार्मिक स्थलों को खोलने का फैसला लिया गया था.उसी के अनसुार आज गुरुवार की सुबह विख्यात शक्तिपीठों ज्वालामुखी, ब्रजेश्वरी, चिंतपूर्णी और नैनादेवी के पट खोल दिए गए. यहां मास्क पहने और सुरक्षित शारीरिक दूरी बनाकर दर्शन के लिए श्रद्धालु पहुंचने लगे हैं.

इससे पहले कोरोना महामारी से बचने के लिए लॉकडाउन लगाया गया था और मार्च माह के दूसरे पखवाड़े में हिमाचल के सभी मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे और चर्च श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिए गए थे. अब आज 170 दिन के बाद इन्हें कई शर्तों के साथ फिर से खोल दिया गया है.

राजधानी शिमला के सभी ऐतिहासिक मंदिरों तारा माता, जाखू और कालीबाड़ी के पट भी आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं. भक्तों को महीनों बाद इष्टदेव के दर्शन करने का सौभाग्य मिला है. श्रद्धालु शासन-प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए देवी-देवताओं के दर्शन कर रहे हैं. मंदिर कर्मचारियों द्वारा प्रवेश द्वार पर थर्मल स्क्रीनिंग की जा रही है. सभी के लिए मास्क लगाना अनिवार्य है.

धार्मिक स्थल पर लगी रेलिंग या अन्य स्थान को छूने की अनुमति नहीं है. घंटी बजाने, सामूहिक आरती-भजन, प्रसाद, चरणामृत व जल चढ़ाने पर प्रतिबंध है. श्रद्धालु केवल भगवान के दर्शन कर सकते हैं

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